इन बरसातों के मौसम में
भीगे छातों के मौसम में
एक याद पुरानी बाकी है
बस यही निशानी बाकी है
ऋतु बारिश वाली भर जाये
कुछ ख्वाब नये इन आँखों में
इन कागज वाली नावों में
कुछ पेड़ों वाली शाखों में ।।
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