उनका कहना जैसे आरी
शुक्र! नहीं है यह दो धारी
सीमाओं पर है बमबारी
और इधर पूरी तैयारी
दानव का संहार करे जो
दुर्गा बन जा अब तो नारी
हारा है हर सिम्त बिजूका
खा गए तोते फसलें सारी
नेता जी सांसत में आते
जब चिट्ठे खुलते सरकारी
मैं,मेरे की धुन में अक्सर
जीती बाजी सबने हारी
भूख ग़रीबी औ बेजारी है
सारा झूठ है सच पर भारी
हां, किरदार बदल जाते हैं
पर नाटक रहता है जारी
पाप " कमल जी " बढ़ता जाता
क्या आयेंगे अब गिरधारी?
-कमल नयन शर्मा
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