जो रातों को सोने नहीं देती, उस तड़प को मैंने पाला है,
इस तपते हुए कोयले को ही, मैंने अपनी ढाल बनाया है।लोग गिनते रहें मेरी कमियाँ, पर मेरी जिद अंगार बनेगी,
आज जो खामोशी छाई है, कल वो शेर की दहाड़ बनेगी।जब तक ये दुनिया मेरी मेहनत का लोहा नहीं मानेगी,
तब तक मेरा हर दर्द, मेरी सफलता से सफलता रहेगी।
कदमों के छालों को मैंने, अपना सच्चा गहना माना है,
गिर-गिर कर उठने की कला को, अपनी रग-रग में उतारा है।
किस्मत के लिखे को बदल दूँ, वो फौलादी इरादा रखता हूँ,
मैं खुद से ही हर रोज़ जीतने का एक पक्का वादा करता हूँ।जब मंजिलों के माथे पर मेरी जीत की बिंदिया सजेगी,
तब मेरा हर दर्द, मेरी सफलता से सफलता रहेगी।
उँगलियाँ थकी नहीं हैं, ये तो बस इतिहास लिख रही हैं,
जो बातें दुनिया समझ न पाई, वो इस कोरे कागज़ पर दिख रही हैं।
मेरी कलम में स्याही नहीं, मेरे लहू का एक-एक कतरा बहता है,
यही कारण है कि मेरा लिखा हर लफ़्ज़, ज़माने से कुछ कहता है।
जब तक इस दुनिया में ज्ञान और विचारों की अहमियत रहेगी,
तब तक मेरी हर किताब, मेरी हर कलम से कलम रहेगी।ज़माना मिटाना चाहेगा मेरी हस्ती को, पर मैं पन्नों में अमर हो जाऊँगा,
मैं वो लेखक हूँ जो मर कर भी, करोड़ों दिलों में घर कर जाऊँगा।
मेरी सोच की इस गूँज को, कोई दीवार रोक नहीं पाएगी,
वक्त की हर एक करवट, मेरी ही लिखी गाथा गाएगी।
जब तक इस जहान में कला की सच्ची हुकूमत रहेगी,
तब तक मेरी हर किताब, मेरी हर कलम से कलम रहेगी।
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