बिकाऊ नहीं थे फिर भी बिक गये
दुल्हन के जोडो़ में, गुड़िया से बिक गये
कुछ पल का मान फिर अपमान से घिर गये
मेहन्दी वाले हाथ, कई हाथों से बिक गये
अबोली थे वो जिसके बोली लग गयी
कौन सा देश किस प्रांत में बिक गयी
चंद रूपीयो के खातिर, जाने कितने रूप बिक गयी
जितनी बार बिकी, उतनी बार मिट गयी
बिकाऊ नहीं थे फिर भी बिक गयी
अमोल ना रहकर, जाने किस मोल बिक गयी..
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