याद आता है वो बचपन का ज़माना अक्सर,
एक छोटे से खिलौने पे मचल जाना अक्सर।
न फ़िक्र-ए-कल थी, न दुनिया की ख़बर होती थी,
वो बेवजह ही हँसना और मुस्कुराना अक्सर।
चाहो तो लौट आए वो बचपन किसी तरह,
दिल ये ख़्वाब देखता है पुराना अक्सर।
वो बारिशों में काग़ज़ की कश्तियाँ बनाना,
वो पानी में ख़ुद ही ख़ुशी ढूँढ लाना अक्सर।
यार अब लौटकर वो दौर कहाँ आएगा,
दिल का बीते हुए लम्हों पे पछताना अक्सर।
क़ैफ़' बचपन तो गया, उम्र भी ढलती गई,
दिल का फिर भी उसी उम्र में रह जाना अक्सर।
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