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तुम हो मेरी प्रेरणा

                
                                                         
                            तुम्हीं हंसी हो तुम्हीं ख़ुशी हो, तुम हो मेरी चेतना,
                                                                 
                            
तुम ही तो मेरी सबकुछ हो, तुम हो मेरी प्रेरणा।
.....2
तुमसे ही दुनिया है मेरी, तुम ही धड़कन सांस हो,
तुम ही मेरी दिलनशी हो, तुम ही दिल की प्यास हो।
तुम ही मेरी जिंदगी हो, इश्क हो मेरा प्यार हो,
तुम्हीं मेरे जीवन की नैय्या, तुम ही तो पतवार हो।

चाहे दुनिया रूठ ही जाए, पर तुम कभी न रूठना,
तुम ही तो मेरी सबकुछ हो, तुम ही मेरी प्रेरणा...-2

सुबह हो मेरी शाम हो तुम तुम ही मेरी जान हो,
तुम हो मेरे रोम रोम में तुम ही मेरी प्राण हो।
तुमसे मेरी हर ख़ुशी है तुम ही हर अरमान हो,
जो भी हूं बस तुमसे हूं मैं तुम ही हर गुणगान हो।

सुख-दुख का संगम है जीवन, पर तुम मुझे कभी न भूलना,
तुम ही तो मेरी सबकुछ हो, तुम हो मेरी प्रेरणा....-2

गर मैं धरती हूं तुम्हारा, तुम मेरे आकाश हो,
तुम्हीं मेरे अंधरों की किरण हो, तुम ही वो प्रकाश हो।
मैं समंदर हूं अगर तो, तुम हो किनारा मेरा,
मैं अगर रात हूं तो, तुम ही वो तारा मेरा।

हाथ में ये हाथ देकर, साथ कभी न छोड़ना,
तुम ही तो मेरी सबकुछ हो, तुम हो मेरी प्रेरणा....2
तुम्हीं हंसी हो तुम्हीं ख़ुशी हो, तुम हो मेरी चेतना,
तुम ही तो मेरी सबकुछ हो, तुम हो मेरी प्रेरणा....4

और अंत में....
तुम्हारी हर ख्वाहिश ख्वाब है मेरा,
तुम्हारी हर तपिश शबाब है मेरा।
तुम हो तो मैं हूं और मैं हूं तो हम हैं,
क्यों कि तुम्हीं से हर जवाब है मेरा।
क्यों कि तुम्हीं मेरी जिंदगी हो....

-दुर्गेश बहादुर प्रजापति
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3 वर्ष पहले

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