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भारती है माँ हमारी

                
                                                         
                            भारती के लाल हैं हम
                                                                 
                            
भारती है माँ हमारी,
जन्म देने से बड़ी है,
पालने की ऋण तुम्हारी।

तन मन धन अर्पित करुँ मैं,
मातृ भूमि की चरण में।
बस यही इक आस मन में,
ले लो माँ अपनी शरण में।

कण कण में बस तेरी मूरत,
तू ही तेरा वास है माँ।
माँ की ममता प्यार दे दे,
मैं तो तेरा दास हूँ माँ।
मै तेरा दास हूँ माँ....

हिमगिरि से हिंदसागर
तक रूप है तेरा सुमार,
सांस्कृतिक सौंदर्यता की
सुषमा है तेरी अपार।

विविधता में एकता का,
अनोखा है संगम यहां।
पूरी दुनिया गान करे,
ऐसा है विहंगम यहां।

देवों की धरती यही है,
राम कृष्ण अवतार यहीं।
रामायण महाभारत गीता,
वेदों का प्रसार यहीं।

वीरों की धरती है भारत,
लहू से पोषित पल्लवित।
दुनिया को जो राह दिखाए,
महामनिषियों से गर्वित।

इसकी सेवा में तत्पर हो
कुछ ऐसा हम काम करें,
फिर से सोने की चिड़िया बन,
जगतगुरु हम नाम करें।
जगतगुरु हम नाम करें....

-दुर्गेश बहादुर प्रजापति

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4 वर्ष पहले

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