आज फ़िर दिल ने कुछ लिखने को कहा है,
तेरी यादों को सितारों में बुनने को कहा है।
आज फ़िर दिल ने .......
गुलशन की वादियों-सी
खिलखिलाती तेरी वो मुस्कान,
पवन के झोकों-सी स्पर्श करती है मन को।
पुष्पों-सा खुश्बू बिखेरता तेरा वो प्यार,
नदी के नीर-सी स्पर्श करती है तन को।
तेरे उन प्यार भरे अफसानों को
दिल ने संजोने को कहा है,
आज फ़िर दिल ने कुछ...........
फूलों पर भौरों-सा मंडराकर
तेरा वो अपनापन जताना,
शब्दों से कुछ न कहते हुए भी
भावों से ही प्यार का अहसास कराना,
फ़िर से उन सारे पलों को
मोतियों के जैसे गूंथने को कहा है,
आज फ़िर दिल ने तुझे अपना कहने को कहा है,
आज फ़िर दिल ने कुछ लिखने को कहा है।
जब-जब आती है तेरी याद
दिल तड़प के रह जाता है,
बयाँ करें कैसे इन टूटे हुए आशियानों को,
इसीलिए दिल उन सारे गमों को यूँ ही सह जाता है।
मुद्दतों बाद दिल ने
शूलों, काँटों भरे डगर पर चलने को कहा है,
आज फ़िर दिल ने...............
उन सारे अफसानों को जज्बातों को
दिल ने कोरे कागज पे दिखने को कहा है,
आज फ़िर दिल ने कुछ लिखने को कहा है।
- दुर्गेश बहादुर प्रजापति
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