जहाँ हर जाति का जाया, लगे अपना ही भाई है|
जहाँ कुल की प्रतिष्ठा पर, जरा ना आँच आई है||
जहाँ घातक डकैतों की, हुई पैदा बगावत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||
जहाँ पैदा हुऐ बेटे, बने इस देश की सेना|
सभी चारों दिशाओं में, बने हैं देश का गहना||
जहाँ हर जाति-मजहब का, बड़े आदर से स्वागत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||
हिन्द के तीन राज्यों में, निडर निर्भीक बहती है|
विकट वन मार्ग में चलकर, कथा साहस की कहती है||
कृषक की शून्य हो जाती, जहाँ पानी की लागत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||
प्रक्रति ने गोद में लेकर, जिसे जी-भर खिलाया है|
यही रतिदेव राजा के, बली की रक्त-माया है||
जहाँ हर गाँव घाटी के, किनारे का सलामत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||
जहाँ पर पाण्डु-पुत्रों ने, जुऐ में देश हारा है|
जहाँ पर द्रोपदी ने, कृष्ण को रोकर पुकारा है||
जिस घाटी से शुरू हुआ, द्वापर-युग में महाभारत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||
जहाँ के सैनिकों ने, सरहदों पर रक्त धोया है|
जहाँ माँ-बाप ने इक वीर को, बेवक्त खोया है||
जहाँ पर जन्म लेती देश की, सच्ची शहादत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||
कर रहे देश को रोशन जो, पलकर इस पावन माटी में|
कितने जांबाज किऐ पैदा, इतनी ताकत है घाटी में||
वैसे तो इस धरती पर, सब नश्वर और नियामत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||
आज देश की राजनीति में, ऐसी निठुर सियासत है|
भुला दिऐ वो वीर जहाँ से, पैदा हुई शहादत है||
फिर तो ऐसी राजनीति को, यही कहूंगा लानत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||
जहाँ कविओं ने अपनी लेखनी से, लेख लिख डाले|
जहाँ डाकू गऐ मारे, जहाँ योद्धा गऐ पाले||
दस्यु कुख्यात गैंगों की, यही पूजा-इबादत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||
कुछ भी कह लो इस घाटी का, वो खौफ अभी भी जारी है|
घाटी घट गई मगर अब भी, मानो सौ-सौ पर भारी है||
जाने कितने ही देख चुकी, वो क्रूरित काल कयामत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||
- जितेंद्र त्रिपाठी 'हेमू'
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