आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चम्बल की शहादत

                
                                                         
                            जहाँ हर जाति का जाया, लगे अपना ही भाई है|
                                                                 
                            
जहाँ कुल की प्रतिष्ठा पर, जरा ना आँच आई है||
जहाँ घातक डकैतों की, हुई पैदा बगावत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||

जहाँ पैदा हुऐ बेटे, बने इस देश की सेना|
सभी चारों दिशाओं में, बने हैं देश का गहना||
जहाँ हर जाति-मजहब का, बड़े आदर से स्वागत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||

हिन्द के तीन राज्यों में, निडर निर्भीक बहती है|
विकट वन मार्ग में चलकर, कथा साहस की कहती है||
कृषक की शून्य हो जाती, जहाँ पानी की लागत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||

प्रक्रति ने गोद में लेकर, जिसे जी-भर खिलाया है|
यही रतिदेव राजा के, बली की रक्त-माया है||
जहाँ हर गाँव घाटी के, किनारे का सलामत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||

जहाँ पर पाण्डु-पुत्रों ने, जुऐ में देश हारा है|
जहाँ पर द्रोपदी ने, कृष्ण को रोकर पुकारा है||
जिस घाटी से शुरू हुआ, द्वापर-युग में महाभारत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||

जहाँ के सैनिकों ने, सरहदों पर रक्त धोया है|
जहाँ माँ-बाप ने इक वीर को, बेवक्त खोया है||
जहाँ पर जन्म लेती देश की, सच्ची शहादत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||

कर रहे देश को रोशन जो, पलकर इस पावन माटी में|
कितने जांबाज किऐ पैदा, इतनी ताकत है घाटी में||
वैसे तो इस धरती पर, सब नश्वर और नियामत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||

आज देश की राजनीति में, ऐसी निठुर सियासत है|
भुला दिऐ वो वीर जहाँ से, पैदा हुई शहादत है||
फिर तो ऐसी राजनीति को, यही कहूंगा लानत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||

जहाँ कविओं ने अपनी लेखनी से, लेख लिख डाले|
जहाँ डाकू गऐ मारे, जहाँ योद्धा गऐ पाले||
दस्यु कुख्यात गैंगों की, यही पूजा-इबादत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||

कुछ भी कह लो इस घाटी का, वो खौफ अभी भी जारी है|
घाटी घट गई मगर अब भी, मानो सौ-सौ पर भारी है||
जाने कितने ही देख चुकी, वो क्रूरित काल कयामत है|
यही चम्बल की ताकत है, यही चम्बल की ताकत है||
- जितेंद्र त्रिपाठी 'हेमू'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर