चुनरी पीली और हो गयी लाल
देखो-देखो उडा़ गुलाल
भांग के नशे में धुत हुए लोग
सब लगा रहे गुजिया का भोग
चाचा ने धतुरा जेब में है छुपाई
कहीं मिलजाए न चाची से डटाई।
पान के बीड़ा भी किया तैयार
रंगो से सजे हैं घर, चौपाल
होली का ये पावन त्यौहार
अपनो में बढा़ दे प्यार ही प्यार।
होली होगी खास और इस बार
नई भाभी आई हैं ससुराल पहलीबार।
अम्मा, चाची गले मिले
पैडो़ में पालास के फूल खिलें ।
रंगो से हो गये हैं तन सरोबर
थक गये सब रंग धो-धोकर।
राधे श्याम की झांकी निकल रही
बच्चे- बड़े सब बजा रहे झाल, करताल।
फागुन का पावन महिना हो रहा समाप्त
जाते -जाते कर गया होली
रंगो में घुली खुशीयों की बरसात।
झिलमिल यादव
गिरिडीह (झारखण्ड)
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