पालास के फूल खिले
सब एक-दूजे से गले मिले।
देखो गाँव में होली के गीत बजे
होली आई ,होली आई ।
भाईया ने छुट्टी ले ली हैं,
भाभी को है संदेश भेजाई।
मीठू , गोलू नाच रहे हैं
होली आई, होली आई।
दादू ने जो अपनी धोती
इतने दिनो तक थी बचाई।
बच्चों ने उसमे रंग भर दिये
गा-गा के सब खा रहे मिठाई।
होली आई, होली आई।
धरा रंगीन हो हैं गयी
आसमान भी मुस्कारा रहा।
बच्चे -बुढे़ सबने एक-दुजे पे रंग बरसायी
होली आई, होली आई।
मीना, रीना देखो सब
एक-दूसरे को दौडा़ रहे हैं।
रंग -बिरंगे लेके गुलाल
अपनी-अपनी कुरती हैं रंगवाई।
होली आई, होली आई।
मैंने भी तो रंगो से
दादी के गालो को किया लाल।
दादी पीछे भागी मेरे
हाथों में लेके गुलाल।
भागते -भागते उनके पैरों में मौच भी आई
होली आई, होली आई ।
अपनापन और प्यार बढा़
दिल से दिल की हुई सगाई।
सबके दिलो में प्यार जगाकर
होली मिटाती हैं बुराई
होली आई, होली आई।
झिलमिल यादव
गिरिडीह (झारखण्ड)
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