धूप भी जरूरी है छांव भी जरूरी है
हार जीत की खातिर दावं भी जरूरी है
मुतमइन न हो दिल जब शहर भी लगे तन्हा
खातिरे सकूने दिल गांव भी जरूरी है
-हयात
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