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बिन साजन के

                
                                                         
                            बिन पायल मैं बिन कंगन के
                                                                 
                            
है घर सुना बिन साजन के
हरदम रहते हैं नयनन में
झूठे किस्से है दरपन के
पढ़ रही धूप ऐसे चितवन पर
चल रही छाया आगे कदम के
फिर यकीन बैठा है बन ठन के
जातक सा मन पार गगन के

 
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11 घंटे पहले

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