है तमन्ना उस घड़ी की, कब बहेगी पितृधारा।
कब गर्व से पापा कहेंगे, ये रहा बेटा हमारा।।
ये फलाने, ये ढेकानें, ध्यान से देखो जरा तुम,,,,,
ये रहा बुड्ढे की लाठी, ये रहा अंतिम सहारा।।
है जरा सा कुछ निकम्मा, थोड़ा सा कामचोर भी है।
लंबा चौड़ा औसतन है, थोड़ा सा कमजोर भी है।
अंदर से थोड़ा मुलायम, बाहर से कुछ कठोर भी है।
शैतानियाँ परिपूर्ण हैं पर, सबके दिल का चितचोर भी है।
जब कोई परेशान कर दे, पापा मेरे आ के बोले,,,,
न सताओ लाडले को, है बड़ा भोला बेचारा।
कब गर्व से पापा कहेंगे, ..............
जब अकेलापन हमें, चहुँओर से ऐसे सताये।
संकटों के रास्तों में, जब कभी हम घर बनाये।।
जब खड़ा होऊं अकेले, थक हारकर के सर झुकाये।
तब कोई उम्मीद की, फिर दूर से ज्योति जगाये।
कब मेरे उन हौसलों को,,,, पापा ऊर्जावान कर के।
हाँक के पतवार मेरी, कब लगाएंगे किनारा।
कब गर्व से पापा कहेंगे.................
क्या करूँ, कैसे करुँ कि, पीठ पापा थपथपाए।
नादानियाँ, अठखेलियाँ भी, पापा को सब मेरी भाए।
लाडला, बेटा हमारा, कह के वो फिर गले लगाए।।
आएगी जब वो घड़ी तो, जा के हम गंगा नहाए।
इस सुहाने, आनन्ददायक, का जशन ऐसे मनाए।
प्रयाग संगम में हम जा के, हम नहाए खूब सारा।।
कब गर्व से पापा कहेंगे ये........
बस तमन्ना पापा कह दें,,, सौ घड़ी में एक बारा।
है चमकता आसमाँ में, लाडला बन के ध्रुवतारा।।
मन प्रफुल्लित हो उठा जब, गर्व से हमको पुकारा।
यह जिंदगी भर की कमाई, जिंदगी भर का सहारा।।
उस भरे महफिल में पापा, कह सके हर एक से कि,,,,
ये रहा मेरा जाँ का टुकड़ा, सबसे अल्हड़, सबसे प्यारा।।
कब गर्व से पापा कहेंगे...........
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