गिरती बारिश की कुछ बूँदें
हैं ये जलती बुझती उम्मीदें
ना वर्षात बनी हैं पूरी
ना अकाल बनी हैं पूरी
छुईमुई सी जंजीरें
छुये तो सिकुडी हैं
ना छुये तो अकडी हैं
गिरती बारिश की कुछ बूँदें
हैं ये जलती बुझती उम्मीदें
मन में है एक बात
फूँस की है वो रात
भीगी धरती कर रही है नाच
हल्की निराशा है बादल में
बरसाता अधजल धरा वर्तन में
आधी सांसें हैं गगन में
तो आधी सांसें हैं बदन में
गिरती बारिश की कुछ बूँदें
हैं ये जलती बुझती उम्मीदें
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