प्रयागराज की सड़कों पर
अस्मिता को बचाने के लिए
एक स्वाभिमानी महिला
मजबूत इरादों से परिपूर्ण
भरी युवावस्था में
वह विधवा हो गयी है
समाज से बिना उम्मीद किये
वह ई- रिक्शा
चला रही है
समाज से कुछ ताने
जरूर मिले होंगे
कुछ अपमान का घूंट
जरुर पीने को मिले होंगे
घर की जिम्मेदारियों को
खुद हाथों में लेकर
इज्जत की रोटी
तलाशने निकल पड़ी है
वह सच में
एक वीरांगना है
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