आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बहाने मत बनाओ

                
                                                         
                            बहाने मत बनाओ
                                                                 
                            
झूठी जिंदगी जीने के लिए

जिंदगी को मिले हैं
कुछ रंगीन पल

इसे हवा में मत उछालो
एक दिन तूम्हारी औकात
शून्य को प्राप्त कर लेगी

तब तुम्हें
अपनी ही जन्नत
कांटे की तरह चुभने लगेगी

जिंदगी के मिले गद्दे पर
नींद नहीं आयेगी

अगर तुमने दुनिया को बेवकूफ बनाया
खुद को बेवकूफ बनने के
कई रास्ते मिलेंगे
-जयचन्द प्रजापति 'जय'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
40 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर