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जो सितम देखते हैं

                
                                                         
                            दिखाया उन्हें जो सितम देखते हैं
                                                                 
                            
कहाँ हम तुम्हारी रहम देखते हैं?

अदब से जुड़े हैं करम देखते हैं
ग़ज़ब लोग हैं ये जनम देखते हैं

किया इश्क़ फिर जान भी ली करें क्या?
उसी इश्क़ में लोग सनम देखते हैं

इधर कम नहीं ठंड रातें तभी ये
अभी से रज़ाई गरम देखते हैं

ज़रा एक आवाज़ भर के लिए हम
यहां पर किसी के कदम देखते हैं

न हम देख पाए जगह भी, जहां वो
जला के हमें आज कम देखते हैं

जरा सा वहाँ रो देते हैं गमों में
जहां भी कहीं आंख नम देखते हैं

कई खो गए ज़िंदगी में इसे फिर
वफ़ादार हर बार हम देखते हैं

हज़ारों नजर नेक हैं पर अभी भी
खुदा में कई तो वहम देखते हैं

सता के 'जयंत' को तुम्हें क्या मिलेगा
चलो ! फिर दिला के कसम देखते हैं

-जयंत पटेल

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8 वर्ष पहले

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