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तार कीजिए

                
                                                         
                            आर-पार कीजिए
                                                                 
                            
आज प्यार कीजिए

इक दफ़ा सही नहीं
बार-बार कीजिए

बहुत हो गया अभी
इंतज़ार कीजिए

अब यहाँ न मुझे यूँ
शर्मसार कीजिए

माशूका कभी-कभी
भेजा तार कीजिए

साहिबा बची हुई
वक़्त पार कीजिए

आपसे सजी फ़िज़ा
यूँ बहार कीजिए

छोड़ दो हिज़्र जुबां
रंग खार कीजिए

है खड़ा 'जयंत' अब
आंख धार कीजिए

- जयंत पटेल

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8 वर्ष पहले

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