आर-पार कीजिए
आज प्यार कीजिए
इक दफ़ा सही नहीं
बार-बार कीजिए
बहुत हो गया अभी
इंतज़ार कीजिए
अब यहाँ न मुझे यूँ
शर्मसार कीजिए
माशूका कभी-कभी
भेजा तार कीजिए
साहिबा बची हुई
वक़्त पार कीजिए
आपसे सजी फ़िज़ा
यूँ बहार कीजिए
छोड़ दो हिज़्र जुबां
रंग खार कीजिए
है खड़ा 'जयंत' अब
आंख धार कीजिए
- जयंत पटेल
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