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मुफ़लिसी

                
                                                         
                            हंस के गम भुला दिया जब से
                                                                 
                            
मुस्कुराकर हवा किया जब से

यूँ हमारी हया जमीं पे है
इब्तिदा हो गयी पिया जब से

देख ले तू जरा टूटे दिल को
तोड़ते हैं उसे सिया जब से

मैं खुशी को तुम्हें दिखा पाया
उस खुदा ने मिला दिया जब से

काश अल्फ़ाज़ भी मिले तुझमें
दुश्मनी में दबा लिया जब से

जान भी जा रही इधर कब से
रौशनी दिखी,उठी ज़िया जब से

शर्म सी आ गई मुझे जबरन
सामने आ गए मियां जब से

इश्क़ में खो गया अभी सबकुछ
जान खोने लगा यहां जब से

मात जो अब 'जयंत' ने खाया
हार महसूस हो गया जब से

- जयंत पटेल

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8 वर्ष पहले

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