हमने भी तुमको जाना है
अपना जो तुमको माना है।
इन आँखों से कर लो बातें
इसमें कैसा शरमाना है।
मरने से भी जो ना टूटे
ऐसा अपना याराना है।
इस दिल को संभालूं कैसे
ये दिल भी तो दीवाना है।
अब एक ही ख़्वाहिश है मेरी
तेरी बाहों में आना है।
है मुझको सोने की जल्दी
ख़्वाबों में तुझको पाना है।
तेरे खातिर मैं भी डरता हूँ
कैसा तेरा घबराना है।
गम हो चाहे अब कुछ भी हो
चाहत में ये मयखाना है।
सबकुछ देने वाला है वो
उसको दुनिया में लाना है।
- जयंत
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