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बेटी

                
                                                         
                            खुशियों की पेटी चली जाएगी
                                                                 
                            
शहर को समेटी चली जाएगी

उस माँ पे क्या बीतेगी जिसकी
सयानी एक बेटी चली जाएगी

लिखा न जाएगा मंज़र हमसे
प्यार को लपेटी चली जाएगी

आँसू में उसको देखा मैंने आज
खैरियत सब लेती चली जाएगी

बचपन बाकी है मन में उसके
समझ वही देती चली जाएगी

बोझिल वो रात कैसे कटेगी
जिसमें वो सोती चली जाएगी

आख़िर वक्त वो आ ही गया अब
तबस्सुम अब देती चली जाएगी

- जयंत

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8 वर्ष पहले

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