तू क्यों होती है भयभीत दामिनी,
तेरी चमक से तो ज़माना भयभीत ।
रक्षा में अपनी सब मीचें लेते हैं नयन,
आकार न पाकर भी काल,
भस्म करने की शक्ति रखती तू ।
तेरा तांडव नभ में दामिनी,
लोग मचाए हाहाकार जैसे आया हो भूचाल ।
रणभूमि के उस अस्त्र की भाँति
दिशा और दशा को चीरती काल
क्षत-विक्षत करने की शक्ति रखती तू ।
नभ में पुकारे तुझे मेघराज, हे दामिनी,
गरजने से पूर्व ही, चमक से तेरे दर्शन
अग्नि की भीषण ज्वाला में लिपटकर
काल बनती प्रतिस्पर्धा में नहीं,
स्वयं में समर्थता की शक्ति रखती तू ।
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