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आजा़दी

                
                                                         
                            मुस्कुराने की तमन्ना तुम हो,
                                                                 
                            
मोहब्बत की हार सादगी तुम हो।

ऐतबार का हर लम्हा तुम हो,
शरारत की हार गूँज तुम हो।

इश्क़ का आग़ाज़ तुम हो,
दिलों का हार नारा तुम हो।

बेज़ुबाँ का हर सहारा तुम हो,
फिर भी ये आज़ादी, तुम इतनी ख़ूबसूरत क्यों हो?

नागेश्वर बनसोडे
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एक घंटा पहले

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