उल्फ़त का अपनी बस यही अंजाम है
रुसवाई हम दीवानों का इनाम है
मिले हैं हज़ारों दिल वहाँ मगर
यहाँ जाने कितने आशिक़ नाकाम हैं
हमारे कत्ल का अब इरादा कर लीजिए
हमारे सर पे मोहब्बत का इल्ज़ाम है
यू तो मेरे है कई यार ग़मख़्वार
उन्हीं में से कुछ अपने बनाम है
हो गया मुझसे मैख़ाने का नुकसान
चढ़ा है जो किसी के आँखों का ज़ाम है
अपना है बस सामान दरवेश
हमारा काम हुआ तमाम है
दिल पर है कई ग़मों के बोझ
ये जो मोहब्बत है यूही बदनाम है
याद आई तेरी तो याद आया मुझे
ऐसे तो जमशेद तेरा जीना हराम है
-नूर हसन
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