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श्याम रंग रंगा रे

                
                                                         
                            श्याम रंग जब आत्मा पर चढ़ जाता है,
                                                                 
                            
दुनिया का हर रंग फिर फीका पड़ जाता है।
काम क्रोध मद लोभ के रंग कच्चे हैं,
दो दिन में ही ये सब रंग उजले-बच्चे हैं।

ये संसारी रंग हैं, धूप में ढलते हैं,
स्वार्थ की आँधी में, पल में बदलते हैं।
पर श्याम रंग ऐसा पक्का रंग गहरा है,
जैसे नभ का अनंत रूप सुनहरा है।

एक बार जो श्याम रंग में रंगा रे,
फिर माया के रंग से न कभी संगा रे।
ब्रह्मांड की गहराई इसमें समाई है,
इसी रंग में तो सारी सृष्टि समाई है।
-- जगदीश प्रसाद शर्मा
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एक घंटा पहले

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