हे श्वेतवर्णी माँ शारदे,
मेरी लेखनी को धार दे।
साहित्य का संपूर्ण ज्ञान,
माँ, मेरे उर में उतार दे।
मुझे लय दे और सुर दे,
कविता लेखन का गुर दे।
अज्ञान, दूर कर दे मेरा,
साहित्य के क्षेत्र में धुर दे।
सदा रहे, तेरी कृपा दृष्टि,
समझ जाऊँ, संपूर्ण सृष्टि।
माँ, मुझे इतना विवेक दे,
हे माँ, कर दे ज्ञान की वृष्टि।
हे माँ, मैं हूँ तेरा ही दुलारा,
मुझको है, तेरा ही सहारा।
हे बुद्धिदायिनी, आशीष दे,
मेरे जीवन में, हो उजियारा।
स्वरचित व मौलिक
इस्लाम अली,पत्रकार
हरिद्वार, उत्तराखण्ड।
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