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हाँ अबकी बार जब हम क़रीब आयेंगे ।

                
                                                         
                            हाँ अबकी बार जब हम क़रीब आयेंगे
                                                                 
                            
हदों को तोड़ेंगे और सरहदें मिटायेंगे

ये दूर दूर से मिलना भी कोई मिलना है
गले लगायेंगे और दिल में तुम्हें बसायेंगे

हमारी प्यास अब आँखों से कहाँ बुझती है
इसे मिटाने को अब तो सैलाब लायेंगे

तुम्हारे साथ मुझे एक हो कर रहना है
जिस्म में रूह की तरह तुझमें हम समायेंगे

मेरा रस्ता भी तू ही और तू ही मंज़िल है
तुम्हीं तक आयेंगे हम और कहाँ जायेंगे

हर ख़ुशी "मेंहदी" की अब आपसे वाबस्ता है
हर क़दम आप मेरे साथ ही बढ़ायेंगे
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एक घंटा पहले

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