सागर की न प्यास किसी को , बस उफनता पानी माना जाए ।
कल की बातें कितनी भी सच हो , आज कहानी माना जाए।
तुम्हारे मष्तिष्क मे परेशानी मानी जाए, या तुम्हारी नादानी मानी जाए ।
एक भाषा से नापोगे ग्यान हमारा, क्या तुमको ग्यानी माना जाए ।
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