आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बस इतना चाहिए

                
                                                         
                            मैं जो कह दूं तुम्हे , सच वही बात है ।
                                                                 
                            
फिर न पूछो मुझे , क्या सही बात है ।
मैं जो कह दूं तुम्हे , दिन नहीं रात है ।
तुम भी कह दो ,सही हां यही रात है ।

रातों को दिन मैं, कहूं दिन को राते , चंदा को सूरज , कहूं चांद तुमको ।
तो तुम भी कहोगे ,कि दिन ही हैं रातें, चंदा है सूरज, कहो चांद हमको ।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर