हम नावाकिफ थे जिस इश्क़ से
उस इश्क़ को बेबाक कर बैठें,
मुद्दतों तक देखा तस्वीर तेरी और
तुझसे मोहब्बत बेहिसाब कर बैठें।१।
होकर मशरूफ तिलावतों में
हम तुझे दुवाओं में याद कर बैठें,
हां हुई हमसे खता ये की
तुझसे मोहब्बत बेहिसाब कर बैठे।२।
हम तेरे संग ता-उम्र जीने-
मरने का हिसाब कर बैठे,
हिसाब करते-करते हम
तुझसे मोहब्बत बेहिसाब कर बैठे।३।
इश्क इतना हसीन है या तुम
हम खुद से ये सवाल कर बैठे
जवाब तो ना मिला लेकिन
तुझसे मोहब्बत बेहिसाब कर बैठे।४।
तुझे पाकर हम अपना,
मुकम्मल हर ख्वाब कर बैठे,
हुई जो गुफ्तगू तुझसे एक दफा तो
तुझसे मोहब्बत बेहिसाब कर बैठे।५।
अपने दिल की हर बेजार गलियों को
हम तेरे इश्क से गुलजार कर बैठे,
ना जाने कब से हम
तुझसे मोहब्बत बेहिसाब कर बैठे।६।
हम खुदा से तुझे पाने की हर-
रोज हर दफा फरियाद कर बैठे,
नादान थे नादान हैं हम शायद इसलिए
तुझसे मोहब्बत बेहिसाब कर बैठे।७।
हम तेरी हर नादान गुस्ताखी को
मुस्कुरा के माफ कर बैठे,
चलो आज हमने भी माना हम
तुझसे मोहब्बत बेहिसाब कर बैठे ।।८।।
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