झलक देख लू तेरी तो जी लेता हूँ
एक पल में जिंदगी के हजारो पल
काश रुक जाए ये घडी ए दिल नशीं यही
न आए कभी कल
मेरे अश्को में दफ़न है तेरी मोहब्बत के फसाने
कोई माने न माने हम तो हैं सिर्फ तेरे दिवाने
दूर होकर भी मैं तुझे न भुला पाया
न चैन से जी पाया न सुकून से मर पाया
किस्मत में न था हमारा मिलना समझते रहे यही हम
काश आगे बढ़कर थाम लिया होता तुम्हारा दामन
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