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शुक का दर्द

                
                                                         
                            मेरी वाणी में राम राम है, पिंजरे में ना मुझे रखो,
                                                                 
                            
उड़ने दो मुझे ऊंचे गगन में,
और तुम भी राम नाम लिखो,
में विरहिणी की आवाज हु,
मैना मेरी है संगिनी,
बिन मेरे कैसे होगी यहां ढोला मारू,
हीर रांझा जैसी कथाएं ये भी तो तुम सीखो।
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28 minutes ago

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