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क्योंकि बिना अस्मिता के यहां जीना भी क्या जीना।

                
                                                         
                            आज में क्या ले जा रहा हु अपने साथ,
                                                                 
                            
बिना अस्मिता मेरी यहां कोई पहचान नहीं,
में बिना अस्मिता के कैसे खुद को कही रख पाऊंगा,
क्योंकि इसके अलावा इसका कोई अन्य विकल्प नहीं,
खुद को बनाने में युग बीत जाया करते है,
तुम कहते हो इसे में यू ही भूल जाऊ,
में नहीं बन सकता तुम सबके जैसा,
क्योंकि बिना अस्मिता के यहां जीना भी क्या जीना।
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43 मिनट पहले

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