आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मन का मधुमास

                
                                                         
                            क्यों खोया सा है आकर्षण तुम्हारा,
                                                                 
                            
क्या तुम्हारे चेहरे पर धूप पड़ती नहीं,
तुम रहते कहा हो दिनभर,
क्या तुम इस तपती जगह से गुजरते नहीं,
लगता है तुमने अपनी मंजू, मंजूषा में कही छिपा दी,
इसलिए तुम्हे इतनी तेज धूप कभी लगती नहीं,
ये मन का मधुमास प्रिय जब एक बार गुजर जाता है,
तब तुम्हारे यौवन पर दीमक लगते देर होती नहीं।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 hour ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर