पो फटी हुआ सवेरा,
अरुणिमा हर तरफ है छा गई,
सोयीं हुई पगडंडियों पर,
अब कदमों की धमक छा गयी,
फूलों ने अंगड़ाई ली,
पेड़ पौधों ने अपनी अलसाई तोड़ी,
किसी ने बिस्तर समेटे अपने तो,
किसी ने अपनी कलाइयां मोड़ी,
कही तालाबो में घड़े डूबे, तो
कही किसी ने खत्म की अपनी रात की पाली,
दौड़ दौड़ कोई सबको जगाता तो,
किसी ने कही खोली अपनी बाड़ी,
अरे बहुत ही सुंदर दृश्य बन पड़ा यहां पर,
मंदिरों में घंटियां खनक उठी,
हाथ जुड़े सबके प्रार्थना में,
गांव की चौपाल पर अद्भुत कांति उमड़ पड़ी।
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