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संस्कृत से उद्भुत हैं हिन्दी...!

                
                                                         
                            हिन्दी के पावन गंगा की
                                                                 
                            
स्वतंत्र धारा स्वतंत्र रुप से बहने दें।
संस्कृत से उद्भुत हैं हिन्दी
इसका नैसर्गिक सौंदर्य कायम रहनें दें।।

हिन्दी की पावन गंगा को
सनातन धर्म की संवाहिका रहने दें।
संस्कृत से उद्भुत हैं हिन्दी
इसका नैसर्गिक सौंदर्य कायम रहनें दें।।

प्रगतिशीलता के नाम पर
हिन्दी में उर्दू की मिलावट न होने दें।
संस्कृत से उद्भुत हैं हिन्दी
इसका नैसर्गिक सौंदर्य कायम रहनें दें।।

दों भिन्न रंग और स्वाद का पानी
दों भिन्न जलधारा के समान बहनें दें।
संस्कृत से उद्भुत हैं हिन्दी
इसका नैसर्गिक सौंदर्य कायम रहनें दें।।

राजनीति के समीकरणों के
चक्रव्यूह में हिन्दी भाषा को न पड़ने दें।
संस्कृत से उद्भुत हैं हिन्दी
इसका नैसर्गिक सौंदर्य कायम रहनें दें।।

सांस्कृतिक दृष्टिकोण से
हिन्दी भाषा की धारा को स्वतंत्र बहनें दें।
संस्कृत से उद्भुत हैं हिन्दी
इसका नैसर्गिक सौंदर्य कायम रहनें दें।।

संस्कृत से उद्भुत हैं हिन्दी
इसे संस्कृत के कार्य को आगे बढ़ाने दें।
संस्कृत से उद्भुत हैं हिन्दी
इसका नैसर्गिक सौंदर्य कायम रहनें दें।।

-ओ सी पटले
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45 minutes ago

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