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पोवारी भाषा उत्कर्ष आंदोलन का उद्देश्य

                
                                                         
                            भाषा मा चमक होना
                                                                 
                            
आकाश की चटक चांदनी वानी।
भाषा मा ओज होना,
प्रातः काल की सूर्य किरणों वानी।।

भाषा को उत्कर्ष होना
युवाओं की चढ़ती जवानी वानी।
भाषा को विकास होना,
बरसाती नदी को बढ़तो पानी वानी।।

भाषा को श्रृंगार होना
नववधू को सोला श्रृंगार वानी।
भाषा को सौंदर्य होना,
वसंत की रंग-बिरंगी बहार वानी।।

भाषा मा कोमलता होना
कमल फूल की पंखुड़ियों वानी।
नव विचारों की वृष्टि होना,
सावन की लगातार झड़ी वानी।।

शब्दों को अलंकरण होना
चोवीस कॅरेट को आभूषण वानी।
भावों को अलंकरण होना,
जननी को स्वाभाविक प्रेम वानी।।

कल्पनाओं की उड़ान होना
आकाश मा गरुड़ झेप वानी।
मनोभावों की उड़ान होना,
उड़तो पक्षियों को झुंड वानी।।

रसों को संचार होना
सुंदर इंद्रधनुषी रंग छटा वानी।
मनोभावों को मिश्रण होना,
रोटी साती गूंथेव आटा वानी।।

भाषा होना दीपावली को
दीप श्रृंखला की रोशनी वानी।
भाषा होना अमावश्या को,
अंधारो ला चिरती रोशनी वानी।।

-ओ सी पटले
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21 घंटे पहले

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