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पोवारी भाषा को भाषिक सौंदर्य

                
                                                         
                            संस्कृत लक उद्भूत भयी से पोवारी ।
                                                                 
                            
हिन्दी की उपभाषा कहलाव् से पोवारी।
मालवा राजस्थान मा भयी से विकसित,
वैनगंगा अंचल मा गूंज रही से पोवारी।।

राष्ट्रभाषा हिन्दी दून प्राचीन से पोवारी ।
हिन्दी की उपभाषा मानी जासे पोवारी ।
पोवारी या हिन्दी दून भी ज्यादा प्रचीन ,
हिन्दी समान सरल भाषा से पोवारी ।।

मधुर लोकगीतों लक समृद्ध से पोवारी ।
उत्तम संस्कारों लक भरीपूरी से पोवारी ।
सनातन धर्म परंपराओं लक सिंचित से,
मातृभाषा गौरवशाली आमरी पोवारी ।।

पोवारी भाषा से शब्दों को मधुबन ।
पोवारी भाषा मीठो शब्दों को संगम ।
मीठो स्वरों को सरगम से पोवारी,
पोवारी भाषा से समाज को परचम ।।

पोवारी भाषा या से छैल छबीली ।
पोवारों को घरों की या से लाड़ली ।
बोलचाल ना लिखनो मा से सरल,
दुनिया की बोलियों मा से निराली ।।

पोवारी बोली से बड़ी भोलीभाली ।
पोवारों को अंतरात्मा की या बोली ।
स्वजनों सीन अगर बोलों पोवारी मा,
बढ़ जासे सहज संबंधों की खोली ।।

ग्रामीण अंचल मा पली पोवारी बोली ।
येको कारण या से बड़ी भोली भाली ।
शब्द वैभव येको बड़ो मनोहारी से,
जीवंत चित्रण मा या से प्रभावशाली ।।

माय की ममता वानी कोमल पोवारी ।
गंगा की धारा वानी निर्मल से पोवारी ।
विरासतों मा या से सबसे मूल्यवान ,
समाज की एकता को धागा से पोवारी ।।

पोवारी भाषा से मीठी मन-मोहिनी ।
साहित्य गगन की या चटक-चांदनी ।
अनमोल धरोहर से या समाज की,
पोवारी भाषा से समाज की संजीवनी ।।

विवाह गीतों मा सेती आदर्शों का संस्कार ।
वर वधू ला राम सीता मानन को से दस्तूर ।
भारत की माटी सीन जुड़ी से पोवारी बोली,
मातृभाषा राजसी अंदाज लक से भरपूर ।।

निसर्ग की बहारों वानी सुंदर पोवारी ।
चंद्रमा ना चांदनी वानी शीतल पोवारी ।
मातृभाषा ला देखो बिहया को गीतों मा,
मन ला सहज मोहित कर लेसे पोवारी ।।

सूर्य रश्मि समान तेजस्वी से पोवारी ।
चन्द्र रश्मी समान शीतल से पोवारी ।
मनोभावों अनुसार या से असरदार ,
सुहागिनों वानी श्रृंगारित से पोवारी ।।

उड़तो पंछी वानी से मातृभाषा पोवारी ।
बहती गंगा वानी से मातृभाषा पोवारी ।
हिन्दी वानी से मातृभाषा की व्याकरण,
माय माता वानी कल्याणकारी से पोवारी ।।

भावों की अभिव्यक्ति मा सक्षम से पोवारी।
मोर पंखों वानी रंग छटा बिखेर देसे पोवारी।
मातृभाषा आमरी मनभावन अति प्रिय से,
रंग-बिरंगी भाव छटा बिखेर देसे पोवारी।।

-ओ सी पटले
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