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पोवारी भाषा की अमर कहानी

                
                                                         
                            पोवारी या पोवारों की वाणी।
                                                                 
                            
भाषा आमरी प्राचीन पुरानी।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा बहतो निर्झर को पानी।।

संस्कृत भाषा लक
उद्भुत भयी से पोवारी वाणी।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा निर्झर को बहतो पानी।।

मालवा राजस्थान की भूमि।
वहां पहले पोवारी भाषा गूंजी।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा बहतो निर्झर को पानी।।

मालवा की किसानी मा गू़ंजी।
मालवा की रणभूमि मा गूंजी।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा बहतो निर्झर को पानी।।

पोवारों की मधुर मीठी वाणी।
समाज की संगाती छाया वानी।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा निर्झर को बहतो पानी।।

मालवा राजस्थान की वाणी।
वोला भायेव वैनगंगा को पानी।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा निर्झर को बहतो पानी।।

मालवा लक आयी पोवारों की वाणी।
समाज को साथ आयी पोवारी वाणी।
कहानी येकी से रमणीय सुहानी,
जसो मधुबन मा निर्झर को बहतो पानी।।

वैनगंगा अंचल मा गूंज रही से वाणी।
खेती किसानी मा गूंज रही से वाणी।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा निर्झर को बहतो पानी।।

बालाघाट बरघाट मा
गूंज रही से पोवारों की मीठी वाणी।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा निर्झर को बहतो पानी।।

विदर्भ की झाड़ी पट्टी मा
गूंज रही से पोवारो की मीठी वाणी।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा निर्झर को बहतो पानी।।

नवयुग मा नवों प्रयासों लक
उन्नत होय रही से पोवारो की वाणी।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा निर्झर को बहतो पानी।।

नायिका या पोवारी संस्कृति की।
जीवनदायिनी पोवारी संस्कृति की।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा निर्झर को बहतो पानी।।

हिन्दी दून प्राचीन आमरी वाणी।
हिन्दी की उपभाषा आमरी वाणी।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा निर्झर को बहतो पानी।।

गूंज रही से सदियों पासून
अजरामर से पोवारों की वाणी।
कहानी येकी रमणीय सुंदर सुहानी,
जसो मधुबन मा निर्झर को बहतो पानी।।

--ओ सी पटले
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2 hours ago

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