दिल के दरिया में उतरना सीख लो,
रेत के घर में ठहरना सीख लो।
आईने कब तक हकीक़त बोलेंगे,
गर्द के पीछे सँवरना सीख लो।
शर्त-ए-उल्फ़त है फ़क़त खामोशियाँ,
ज़ब्त के साँचे में ढलना सीख लो।
रात की दहलीज़ पर बैठे हो क्यों,
दिन दुपहरी तुम भी रोना सीख लो।
उम्र भर का साथ मुश्किल है मगर,
लम्हा लम्हा साथ चलना सीख लो।
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