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मौसम और मैं

                
                                                         
                            मौसम भी कहानी कहता है,
                                                                 
                            
बारिश के बहाने वो भी रोता है,
बोलना चाहता है किसी से वो दिल भी बात,
तरस जाता है,
परेशान होता है,
और फिर बरस जाता है,

देखता हूं उसे मैं,
आंसू उसके पढ़ता हूं,
शब्दों में पिरोता हूं उसे,
उसके जज़्बात लिखता हूं,

मुस्कुराता है भीगी पलकों से,
कभी बिखर जाता है,
दर्पण दिखता हैं उसे मुझमें,
श्रृंगार करता है,
और निखर जाता है |


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6 वर्ष पहले

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