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ज़माने बीत गए

                
                                                         
                            एक ज़माना बीत गया उससे बात हुए,
                                                                 
                            
कई ज़माने बीत गए उसका दीदार हुए।

वो पहली मोहब्बत का सिला था,
जो आज भी मेरा दिल उसके लिए फ़ना था।

कसक है दिल में उसकी,
ख़ला भी है उसकी।

फ़िरदौस-ए-मोहब्बत की तपन में दिल ज़ार-ज़ार है,
मुझे आज भी उससे मोहब्बत बेशुमार है।

वो हाथ पकड़कर चलना उसका,
मेरे दिल को बेहद ख़ास है।

लम्हे मेरी मोहब्बत के,
सिर्फ़ उसके राज़दार हैं।

वो लौटकर आए, ऐसी आस है,
के दिल को बस उसका ऐतबार है।

मुझे आज भी उसका इंतज़ार है...
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51 मिनट पहले

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