वे तुम्हारे सुख के दिनों में कभी दिखाई नहीं देंगे।
उन्हें तुम्हारी हँसी से कोई मतलब नहीं, उन्हें तुम्हारी सलामती से कोई प्रेम नहीं।
वे बस इंतज़ार करेंगे
कब कोई रिश्ता तुम्हारी गर्दन दबाए, कब कोई अपना तुम्हें पराया कर दे,
कब कोई ख़ूबसूरत सपना तुम्हारी आँखों में दम तोड़ दे।
और जैसे ही तुम टूटोगे, वे उतर आएँगे। बहुत धीरे। बहुत शालीनता से।
पहले तुम्हारा दर्द पूछेंगे, फिर उसकी वजह,
फिर उस जगह को ढूँढेंगे, जहाँ तुम सबसे ज़्यादा कमज़ोर हो।
और फिर, वहीं चोंच मारेंगे।
तुम्हारे आँसू, उनकी स्याही होंगे,, तुम्हारी चीख़ उनका छंद,
तुम्हारा अकेलापन, उनकी सबसे सुंदर पंक्ति।
वे तुम्हें बचाएँगे नहीं, वे तुम्हें मरहम भी नहीं देंगे।
वे बस तुम्हारे घाव को, थोड़ा और खुला छोड़ेंगे,
ताकि ख़ून बहता रहे, ताकि कविता चलती रहे।
उन्हें तुम्हारी मौत से भी, इतना प्रेम नहीं
जितना तुम्हारी मृत्यु से, एक सुंदर रूपक बनाने से है।
इसलिए सावधान रहना
जब कोई कवि, तुम्हारे आँसुओं को, बहुत ध्यान से देखे,
तो समझ जाना, शायद वह तुम्हें समझ नहीं रहा।
वह बस देख रहा है, कि तुम्हारे टूटने से
कितनी अच्छी कविता निकलेगी।
- हेमंत रजक
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