काँधे पर डाले बोझ चला ,
मैन जाने किस ओर चला।
सब पा लेने की होड़ में,
कुछ छू लेने की दौड़ में,
मुट्ठी में जकड़ी रेत सी,
हौले से रिसती ज़िन्दगी।
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