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वो भी कक्षा साथ पढ़ी थी

                
                                                         
                            वो भी कक्षा साथ पढ़ी थी
                                                                 
                            
स्वरचित पंक्तियां-हरिसिंहगोलिया हर्ष
मैं जब कक्षा सात में पढ़ता
वो भी कक्षा साथ पढ़ी थी
सामने बैठकर हमें देखती
हम भी उसको देखा करते
वो भी देखती नज़र चुराकर
मन की मन में रह जाती थी
आग प्रेम की लगा शायद वो
हमरे तन में बह जाती थी
मैं जब कक्षा सात पढ़ा था
वो भी कक्षा साथ पढ़ी थी

मैं कुछ सुंदर चित्र बनाता
ब्रेक टाईम बस्ते में घुसती
उन चित्रों को चूम चूम कर
अधर गुलाबी कर लेती थी
जब हम आते अपने घर से
चित्रों को हम गीला पाते
मंद मंद मुस्काती रहती
फ़िर वो हमको तड़पाती थी
जिस बस्ते में बस्ती निगाहें
वही निगाहें रो देती थीं
मैं जब कक्षा सात पढ़ा था
वो भी कक्षा साथ पढ़ी थी

मैं जब रोता वो रोती थी
मैं जब हंसता वो हंसती थी
उसके दिल में गीत कलम से
हमने कुछ कुछ खत में लिखे थे
जब वह पढ़ती रो दे देती थी
पन्नों को भी भिगो भिगो कर
वक्त वही एक छवि कवि को
चित्र बनाते सहलाती थी
मैं जब कक्षा सात पढ़ा था
वो भी कक्षा साथ पढ़ी थी

मैं जब घर को आता अकेला
वो भी घर को चल देती थी
सुनसान जगह पर प्रेम जताती
चलते चलते चमक चांदनी
चंपा सी मुस्काती थी
जैसे ही हम घर दरवाज़े
अंदर जाते वो मुरझाती
जब हम आते वो आती थी
पंछी बन वो उड़ आती थी
मैं जब कक्षा सात पढ़ा था
वो भी कक्षा साथ पढ़ी थी


आठवीं कक्षा में जब आया
उसने हमको सपने दिखाए
मैं भी तुमको प्यार करूं हूं
तुम भी मुझको प्यार करो ना
मैं भी जिंदगी भर साथ रहूंगी
तुमको हरदम प्यार करूंगी
आंगनबाड़ी या खेत सरसों के
पर तेरे ही साथ चलूंगी
वहीं खेत पर बीच रास्ते
हम तुम दोनों ब्याह करेंगे
इसी बात पर हम क्यों दोनों
एक दूजे से झगड़ पड़े थे
तब से बारह तक मिलना जुलना
बंद हमारा होई गया था
मैं जब कक्षा सात पढ़ा था
वो भी कक्षा साथ पढ़ी थी

फर्स्ट डिवीजन पास हुए तो
फ़िर से हमसे जुड़ वो गई थी
न जाने हम प्रेम उसी से
बहुत बहुत ही करने लगे थे
ना रात को नींद आती थी
ना दिन में कुछ चैन मिला था
अब तो वो सपने अपने में
आ आकर के हमको रुलाती
कुछ कुछ हम भी रो देते थे
कुछ कुछ वो भी रो देती थी
वो भी हमको लिखने लगी खत
हम भी छुप छुप उनको पढ़ते
धीरे धीरे प्रेम को जाना
प्रेम हमारी प्रतीक्षा में था
जब जब उसकी याद सताती
हम भी उसकी गली चल देते
वो भी दरवाज़े अपने पर
बैठ हमारी बाट जोहती
बस दर्शन हो जाते प्रेम के
परम भक्त उसके हो जाते
मैं जब कक्षा सात में पढ़ता
वो भी कक्षा साथ पढ़ी थी
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6 घंटे पहले

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