हर वर्ष पधारें माँ गंगा, रसमय धार बहाती हैं,
लेटे हुए वीर बजरंगबली को, ममता से नहलाती हैं।
धन्य हुआ प्रयागराज धाम, मिटे सकल संताप,
गंगा मैया की गोदी में, धुलते सब दुख-पाप।
प्रयागराज की पावन धरती, संगम तट का धाम,
अमृत धार बहाने आईं, गूंजे जय श्री राम।
मैया की गोदी में लेटे, मुस्काएँ हनुमान,
दिव्य मिलन यह देखकर, पुलकित हुए सुजान।
प्रकट हुआ अलौकिक दृश्य, जागे सनातन भाग,
गंगा-अंजनीपुत्र मिलन से, धन्य हुआ प्रयाग।
-तीरथ प्रसाद गुप्ता
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