समुद्र की तह में रहकर ही सीप ने कीमत पाई है,
घिस कर ही शिला के सीने पर चंदन ने सुगंध फैलाई है।
तूफानों के थपेड़ों से कभी तू घबराना मत मुसाफिर,
मुकद्दर वही लिखता है जिसने दर्दों में मुस्कान सजाई है।
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