भारी विपदा, घनघोर अँधेरा,
कारा के ताले टूट गए,
वसुदेव चले जब यमुना पार,
सब छल के पहरे छूट गए।
अधर्म की सत्ता भस्म कर,
सत्य का दीप जला गए,
कंस की क्रूरता का अंत करने,
स्वयं माधव आ गए!
बरसों के विरह को विराम मिला,
मिट गया गोपियों का इंतज़ार,
कान्हा के पावन चरणों से,
सँवर गया संसार!
- तीरथ प्रसाद गुप्ता
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