"माँ: सृजन, शक्ति और समर्पण"
ममता की मूरत, शक्ति का धाम,
तेरे चरणों में माँ, शत-शत प्रणाम।
सृजन, पालन, सिद्धि, तू ही तो आधार,
तेरी कृपा से पूर्ण हो हर स्वप्न साकार।
बालक की हर कल्पना को तू ही दे आकार,
जीवन-पथ पर राह दिखा, दे सुख का सार।
अंतर्मन में अंकित तेरी दिव्य छवि माँ,
तू ही जग की जननी, तू ही परम-गति माँ।
निशदिन चमके जीवन में तेरी कृपा का प्रकाश,
चरणों में तेरे सदा, बना रहे विश्वास।
- हरि ओम सोनू
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